* तारे *
ये रजनी के उर क्षत सजनी ! चम-चम करते रहते प्रतिपल,झर-झर झरते रहते हर क्षण,पी-पी कर ह्रदय रक्त पागलये लाल बने रहते सजनी ! ये रजनी के उर क्षत सजनी ! वह दीवानी ना जान सकी,पागल सुख के क्षण पा न सकी, सूने उर में भर अंधकार जग को चिर सुख देती सजनी ! ये रजनी के...
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Sadhana Vaid
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[25 May 2010 23:36 PM]



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