मेरे तट पर आते रहते है ज्वार भाटे ....
जीवन की राह भी कैसी कैसी पगडंडियों से गुजरती है - कभी धुप तो कभी छाँव. कभी इतने काम कि फुरसत न मिले ब्लॉग लिखने की भी. आज सुबह से शाम तक बहुत व्यस्त रहा और ब्लॉग लिखने या पड़ने का कतई समय नहीं मिला. अभी लग रहा है कि बहुत कुछ है अधूरा !!...
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राम त्यागी
चक्रव्यूह
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[25 May 2010 23:37 PM]



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