कविता :हवा चली

BAL SAJAG हवा चलीहवा चली भाई हवा चली ।दूर-दूर तक हवा चली ॥ठंडी गर्म है हवा चली ।हवा चली भाई हवा चली ॥गर्मी में तो आम गिरेगें ।आमों के हम स्वाद चाखेगें ॥आमों के हम पेड़ लगायेंगे ।हवा चली भाई हवा चली ॥लेखक :लवकुश कुमारकक्षा :७अपना घर... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[25 May 2010 23:08 PM]

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