मन ख़ुशियों से फूला : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" की नई बालकविता
♥ ♥ मन ख़ुशियों से फूला ♥ ♥उमस-भरा गरमी का मौसम,तन से बहे पसीना!कड़ी धूप में कैसे खेलूँ,इसने सुख है छीना!!कुल्फी बहुत सुहाती मुझको,भाती है ठंडाई!दूध गरम ना अच्छा लगता,शीतल सुखद मलाई!!पंखा झलकर हाथ थके जब,मैंने झूला झूला!ठंडी-ठंडी हवा लगी तब,मन ख़ुशियों...
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रावेंद्रकुमार रवि
बालकविता
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[25 May 2010 23:15 PM]



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