कितनी क्षुद्र लेखनी मेरी

नीरव गिनती के गीत जुटा पायाअपनी आँहों को उर में भरतप कर, जलकर जीवन भर संसृति सागर से गगरी मेंदो-चार बूँद ही भर पायागिनती के गीत जुटा पायाअलबेली मंजिल के दुष्कर पथ परकुछ फूल खिले कुछ काँटे थेइनकी ही गंध चुभन कोअपनी साँसों में भर लायागिनती के गीत सुना... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. राजेश नीरव
views
17
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
4
[25 May 2010 22:29 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix