अकाल और खशबू
राजू-पप्पू के पापा, तुम्हारा कागज मिला। जी जाने कैसा-कैसा हो गया। पप्पू को माई की गोद में डालकर मैं तो सीधे चारे की कोठरी में भागी। किंवाड़ उड़का कर पढ़ा। सब हाल जाने। कमठाने की बजाय अब तुम ताकड़िया साहब के बंगले पर काम करते हो यह ठीक है, मगर मेम साहब की...
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madhav
kahani
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[24 May 2010 12:26 PM]



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