बेबसी, छटपटाहट और गहरा दर्द

आज शाम भारत से एक फोन आया जिसने अन्दर तक हिला दिया. उम्मीद नहीं थी कि अपने ही परिवार के कुछ करीबी रिश्ते इस मोड़ पर आ जाएँगे जहाँ दर्द ही दर्द है. रिश्ते तोड़ने जितने आसान होते हैं उतना ही मुश्किल होता है उन्हें बनाए रखना. पल नहीं लगता और परिवार बिखर... [पूरी पोस्ट]
writer मीनाक्षी

बेचैन मन की बातें ..

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[25 May 2010 16:53 PM]

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