पल दो पल हैं प्यार के - नुसरत और राहत कि आवाज में एक ही गीत, मगर दो अलग अंदाज
एक ही धुन पर बुने हुए यह दो गीत दो ना होते हुए भी दो हैं.. दोनों ही गानों में सिर्फ एक पैराग्राफ का अंतर है और सिर्फ आवाजों का.. वैसे यह मेरी अपनी राय है कि मुझे राहत कि आवाज ऐसी सुन कर कुछ निराशा हुई थी, उससे कुछ अधिक ही उम्मीद जो हम अक्सर लगा बैठते...
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PD
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[25 May 2010 16:12 PM]



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