गिरना
गिरना गिर कर सम्हलना, सम्हल के उठना नामुमकिन नहीं है मगर गिर गए कहीं दुनिया की नजरों से ऐसे गिरे हुए को उठाना मुमकिन नहीं है यदि सोचते हैं, दुनिया से उठ जाना बेहतर होगा तो उठ तो जाओगे, मिलेगी जन्नत या...
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सूर्यकान्त गुप्ता
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[25 May 2010 13:21 PM]



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