स्वयं की बुराइयों का भय
मन डरता है गुलाब के उस फूल की भाँति जिसे भय हो कि जब उसे चाहने वाला उसे छूने लगेगा तो उसके हाथों में कहीं काँटे न चुभ जायें...
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swaarth
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[25 May 2010 12:41 PM]



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