मुर्ख प्राणी किसान तू कब सुधरेगा, दो बूंद पसीने से क्या सारा खेत भरेगा..........(कविता}
विक्षिप्त प्राणी किसान तू कब सुधरेगा,दो बूंद पसीने से क्या सारा खेत भरेगा।कभी वो चीखते हुए बैलों को हांकता,कभी खुद रूककर हल पकड़े हांफता,कभी छाती पर हाथ रख धीरे से खांसता,उदर रोग से बीमार मनुष्य बेमौत मरेगा।विक्षिप्त प्राणी किसान तू कब सुधरेगा,दो बूंद...
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राजेन्द्र मीणा
किसान
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[25 May 2010 13:01 PM]



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