A poetess blog

A poetess blog स्नेह का दीप जलाते वक़्तसोचा नहीं होगा उसनेकी केवल उन्ही दीपों कोजलने का अधिकारदिया है इस समाज नेजो जलते है मंदिरों में,घर की मुंडेर परया मृत्यु पश्चात सिराहने पर.इसीलिए छुपाती फिरी वोअपने स्नेह दीप कोलेकिन प्रेम का प्रकाशकब रुका है रोकने से?पर उसकी... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[25 May 2010 11:52 AM]

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