कुंभ के बहाने संतों का सच
कुंभ और उसके बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जिन्हे भारतीय समाज सन्यासी,साधु और संत जैसे सम्मानपूर्ण पदवियों से नवाजता रहा है वे लोग क्या वाकई इन विशेषणों के योग्य हैं भी कि नहीं ।कहीं वे गृहस्थ जीवन की कठिनाईयों या दुखों से भागने वाले कुंठित और अतृप्त...
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Rajen Todariya
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[25 May 2010 10:53 AM]



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