दो ऐसा वरदान प्रभो !

Albelakhatri.com परचिन्तन, परहित, परसेवा, परमार्थ के काज करूँपवन - गति से चलूँ सत्य पे, सदा झूठ से लाज करूँवैर - भाव न रखूं किसी से, दो ऐसा वरदान प्रभो !झुकूं सदा मैं सभी के आगे, सबके हृदय पे राज करूँ... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
views
17
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
8
[25 May 2010 10:31 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix