सोमवार की एक शाम --ललित शर्मा जी के नाम ---
रविवार का दिन । छुट्टी का दिन । काम से आराम का दिन । आराम --यदि नसीब हो सके तो ।अक्सर इस मृत्युलोक में मनुष्य जीवन की दिनचर्या में इस कदर फंसा रहता है , कि आराम सिर्फ ख्वाबों ख्यालों में ही रह जाता है। इसी रविवार अविनाश जी ने एक ब्लोगर मिलन का कार्यक्रम...
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डॉ टी एस दराल
ललित शर्मा
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[25 May 2010 09:23 AM]



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