हम

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... कुछ ख्वाब तुमने बुने थे, कुछ मैंने, कुछ हमनेऔर कुछ अध्बुने ही रह गये थे वक़्त की मेज़ पे.तुम वो खवाब मुझ से और मैं तुमसे मांगता रहा,आज जब कई साल बाद मैंने महसूस किया कि वोन तुम्हारे पास थे और न मेरे, वो ख्वाब आज भी वक़्त की मेज़ पर महफूज़ उसी करवट सोये हुए... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

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[25 May 2010 09:17 AM]

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