आठवीं क़िस्त- कौन चला बनवास रे जोगी

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. इस क़िस्त कि शुरूआत इस ग़ज़ल से कर रहे हैं ,जिसमें जगजीत सिंह ने जोगी शब्द को अलग-अलग अंदाज़ में पेश किया है। ठीक वैसे ही जैसे शायरों ने इस मुशायरे में जोगी को नचाया।नये-पुराने शायरों को हमने एक साथ शाया किया है ताकि प्रयास, अनुभव से सीख सके और अनुभव, नये... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल ख़याल

कौन चला बनवास रे जोगी

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[25 May 2010 09:25 AM]

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