पाठकों को तरसती एक प्रतीकात्मक कविता
मिटटी का प्रश्न गुँथी हुई मिटटी का प्रश्न घूमते हुए चाक से मुझे क्या बनना है |शीतल जल की गगरी या गर्म पेय का पात्र,मिटटी के प्रश्न पर चाक का भौचक्का रह जाना |चलते चलते रुक जाना गहरी सोंच में डूब जाना |क्षण भंगुर जीवन और इतना गंभीर चिंतन अचानक चाक...
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Sunil Kumar
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[25 May 2010 08:16 AM]



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