शर्म
(तभी वह चाहता है कि सभी बेशर्म हो जाएँ तो उसे शर्म करने की आवश्यकता न हो । और यह खेल अनवरत रूप से चल रहा है । चाहे आज किसी भी क्षेत्र में देख लें )। भारतीय संस्कृति-सभ्यता-समाज और व्यक्तिगत आचरण में शर्म का बहुत ही महत्त्व है। अब तो यह कहना चाहिए कि ;...
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शंकर फुलारा
शर्म
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[25 May 2010 07:51 AM]



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