च्यवन ऋषि का आगमन - उत्तरकाण्ड (13)

संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण एक दिन जब श्रीराम अपने दरबार में बैठे थे तो यमुना तट निवासी कुछ ऋषि -महर्षि च्यवन ऋषि जी के साथ दरबार में पधारे। कुशल क्षेम के पश्‍चात् उन्होंने बताया, "महाराज! इस समय हम बड़े दुःखी हैं। लवण नामक एक भयंकर राक्षस ने यमुना तट पर भयंकर उत्पात मचा रखा है।... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[25 May 2010 07:03 AM]

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