हाशिये में दर्द !

hindigen दर्द को हाशिये में डालो,मुस्कानों के सिलसिले से एक इबारत नयी लिखो,उनके बीच बसबिंदियाँ दर्दों की हों.गर मुस्कानें  कम लगेंखोज लो  बचपन मेंनिर्दोष, खामोश जिंदगियों में  और उनको बाँट लोजग के सारे गमउनके... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव

kavita

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[25 May 2010 04:49 AM]

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