अब आइने में अक्स नहीं, आंकड़ों का इंद्रजाल दिखता है।
’’बेचारा आम आदमी। हर किसी के बहकावे में आ जाने वाला अदना सा आदमी। आह निकलने पर झांसे के मलहम और आश्वासन के उपचार से चुप हो जाने वाला भला आदमी। जानते हो पंडत, महामहिम मेड़म ने क्या फरमाया है ?’हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता मंहगाई से आम आदमी को राहत दिलाने की...
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[24 May 2010 10:45 AM]



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