लौटो , लौट आओ
कुछ कदम पीछे लौटोआगे विनाश है सब ख़त्म होनेवाला है...पीछे मुड़ोकिसी हल्की सी बात परघंटों हंसोतनी नसों को आराम दोलौटो , लौट आओदोष किसी और का नहीं संभवतः दोष तुम्हारा भी नहींदोष ' और ' की चाह प्रतिस्पर्धा की दौड़ की हैक्या मिलेगा गुम्बद पे जाकर ?अभी भी...
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रश्मि प्रभा...
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[25 May 2010 03:38 AM]



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