(गीत)कभी सुना है गीत

अशोकनामा Shareकभी सुना है गीत श्रमिक का जो वो रातों में गाता हैसूरज संग जल-जल जो पाया गाकर उसे भुलाता है कभी सुना है गीत पथिक का राह में जो दोहराता हैमंज़िल देती आवाज़ें ; अक्सर छूट गया भी बुलाता हैकभी सुना है गीत विरह का जो आंसू बन जाता हैशब्द न कोई सुर संगी पर सब... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक

ashok jamnani

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[25 May 2010 01:44 AM]

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