खोयी थी खेल-खेल में........

NirjharNeer .. ख़ुद को ढूँढ़ता हूँ या खुदी को ढूँढ़ता हूँकैसी ये बेखुदी है मै किस को ढूँढ़ता हूँ !कस्तूरी हिरन जैसे मैं भी दौड़ रहा हूँ खुद से बाहर जाके ख़ुदा को ढूँढ़ता हूँ !पढ़ ना सका हूँ मैं लिखा आज तक उसकाइन हाथों की लकीरों में मुकद्दर को ढूँढ़ता हूँ !अश्कों के... [पूरी पोस्ट]
writer निर्झर'नीर
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[25 May 2010 01:36 AM]

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