अंधा न बना दे पैसे का पर्दा
पिछले दिनों मुझे एक सम्मान समारोह के तहत लखनऊ जाने का मौका मिला। रास्ते से गुजर रहा था कि एक धर्मशाला पर निगाह गई। धर्मशाला का नाम किसी सेठ के नाम पर था। मन में खयाल आया कि पहले खुद पैसे को इज्जत कमानी पड़ती थी। धनाढ्य वर्ग समाज में इज्जत कमाने के लिए...
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प्रसून जोशी
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[25 May 2010 00:05 AM]



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