इस बेतुके नाटक की जड़ में भी तो जाइए
उमेश चतुर्वेदीअस्सी के दशक के आखिरी दिनों में चौधरी देवीलाल जब अपने राजनीतिक कैरियर के उफान पर थे, तब उन्होंने एक नारा दिया था। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अलावा तीसरे मोर्चे के तकरीबन सभी दलों का यह बरसों तक सबसे प्यारा और प्रभावशाली नारा था –...
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उमेश चतुर्वेदी
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[25 May 2010 00:31 AM]



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