बड़ी बहन

उधेड़-बुन बड़ी बहन जब बढ़ी हो रही थीमाँ को चिंता बड़ी हो रही थीजब जो चाहे खा ले पी लेकैसे होगे हाथ इसके पीले?एक समय थी फूल सी कायाअब खा-खा के फूल रही है!एक मिली ताई आतातायीबोली बंद करो दुध-मलाईसूखी रोटी में सुख है भाईमाँ को बात तुरंत ये भाईलड़्डू-पेड़ा हलवा-पूड़ीसब के... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

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[25 May 2010 00:00 AM]

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