कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँ
जिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँझूठे वादे करूँ कब तककब तक प्यार की कसमें खाऊँरस्में दकियानूसी निभाऊँ कब तक कब तक झूठी बात करूँजिंदगी कब तक तुझसे फ्लर्ट करूँजानता हूँ तू नहीं महबूबा मेरीछोड़ कर साथ एक दिन जाएगीतो फिर आज ही क्यों न कहूँलिव मी अलोन, क्यों बोझ...
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डॉ. राजेश नीरव
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[24 May 2010 22:50 PM]



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