ऐ सुनो !
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती शिखा वार्ष्णेय जी की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... सुनो! पहले जब तुम रूठ जाया करते थे न,यूँ ही किसी बेकार सी बात परमैं भी बेहाल हो जाया करती थी चैन ही नहीं आता था मनाती...
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अभिलाषा
जीवन-वृत्त
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[24 May 2010 22:30 PM]



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