कविता: कवि-मनीषी -आचार्य श्यामलाल उपाध्याय

भारत-ब्रिगेड साधना संकल्प करने को उजागर औ' प्रसारण मनुजता के भाव विश्व-कायाकल्प का बन सजग प्रहरी हरण को शिव से इतर संताप मैं कवि-मनीषी. अहं ईर्ष्या जल्पना के तीक्ष्ण खर-शर-विद्ध लोक के श्रृंगार से अति दूर बुद्धि के व्यभिचार से ले दंभ भर उर रह गया संकुचित करतल... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्य नर्मदा divya narmada
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[29 Mar 2010 00:38 AM]

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