काव्य रचना: मुस्कान --संजीव 'सलिल'
काव्य रचना: मुस्कान संजीव 'सलिल' जिस चेहरे पर हो मुस्कान,
वह लगता हमको रस-खान.. अधर हँसें तो लगता है-
हैं रस-लीन किशन भगवान.. आँखें हँसती तो दिखते -
उनमें छिपे राम गुणवान.. उमा, रमा, शारदा लगें
रस-निधि कोई नहीं अनजान.. 'सलिल' रस कलश है जीवन
सुख देकर बन...
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दिव्य नर्मदा divya narmada
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[31 Mar 2010 13:03 PM]



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