मुक्तक: संजीव 'सलिल'

भारत-ब्रिगेड मन मंदिर में जो बसा, उसको भी पहचान. जग कहता भगवान पर वह भी है इंसान.. जो खुद सब में देखता है ईश्वर का अंश- दाना है वह ही 'सलिल' शेष सभी नादान.. ************ संबंधों के अनुबंधों में ही जीवन का सार है. राधा से,मीरां से पूछो, सार भाव-व्यापार है.. साया छोडे... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्य नर्मदा divya narmada
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[20 Apr 2010 16:27 PM]

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