नव गीत: समर ठन गया... --संजीव 'सलिल'
* तुमने दंड दिया था मुझको, लेकिन वह वरदान बन गया. दैव दिया जब पुरस्कार तो, अपनों से ही समर ठन गया... * तुम लक्ष्मी के रहे पुजारी, मुझे शारदा-पूजन भाया. तुम हर अवसर रहे भुनाते, मैंने दामन स्वच्छ बचाया. चाह तुम्हारी हुई न पूरी, दे-दे तुमको थका विधाता. हाथ...
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दिव्य नर्मदा divya narmada
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[01 May 2010 11:10 AM]



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