अब तो बस करिए ज्ञान जी…
रात को सवा दस बजे सोफ़े पर लेटकर जी-टीवी पर १२/२४ करोल बाग के काण्ड देख रहा था। लेटकर ब्लॉगरी नहीं कर सकता इसलिए शाम को एक घण्टा इसी प्रकार टीवी देखना अच्छा लगता है। ऑफिस और गृहस्थी के कामों की थकान मिटा ही रहा था कि फोन पर सूचना मिली कि ज्ञानजी के...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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[24 May 2010 19:00 PM]



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