"जन्मदिवस"
हल्दी की पोटली फिर से हाथ देते होमृत्यु की राह पर जीवन को साध देते हो.सिर्फ एक तारीख बढ़ने भर से ,जीवन की सीमायें माप लेते हो.जीवन की ढलती सांझ परपल भर मैं कैसा समां बाँध लेते हो.साँसों की घटती उम्र को ,क्यूँ "जन्मदिवस" का नाम देते हो...
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narendra pant
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[24 May 2010 18:27 PM]



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