तेरी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद कैसे
इस देश में और हिन्दी वालों में बहुत सहिष्णुता है यह तो ब्लाग जगत ने जाहिर कर दिया है.लोगों की भी गलती नहीं है . जिस देश में संघर्ष ही जीवन हो ज्यादातर लोगों के लिए वहाँ और क्या अपेक्षा की जा सकती है किसी भी साधन या मंच के उपलब्ध होने पर . अकेला होना...
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डॉ महेश सिन्हा
हिन्दी ब्लाग
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[24 May 2010 14:41 PM]



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