मैं और मेरी तनहाई...

मेरी दुनिया मेरा जहां.... कुछ पल फ़ुरसत के...आज फ़िर से मिले कुछ पल फ़ुरसत केकुछ पल अपनें लिएकुछ अपनी कलम के लिएकुछ पुरानी यादों से दो चार होती हुईकुछ पुरानें दोस्तों सेगप्पे लडाती अपनें बचपन सेकुछ पल चुरातीवाह क्या खूब गुज़रीयह सुबहवाह क्या खूब मिलीमैं और मेरी तनहाई...मैं और... [पूरी पोस्ट]
writer देव कुमार झा
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[24 May 2010 13:53 PM]

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