एक और दिन बीत गया, एक और साल
एक और दिन बीत गया। प्रधानमंत्री ने कुछ बोला, सबने कुछ सुना, विश्लेषण हुए, और एक और साल बीत गया इस सरकार का। वही न्यूज़ पढ़ी और आ गए घर। प्रधानमंत्री शरीफ़ आदमी हैं, सबने फिर कहा, सबने फिर सुना। सच में, कई बार तो बहुत ही बोरिंग लगने लगता है अपना काम।...
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Kishore Ajwani
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[24 May 2010 13:16 PM]



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