मैं तो बीमार था, मुझे पापा ने क्यूं छोड़ा ?
यह ब्लॉग अक्षम बच्चों के संघर्ष को समर्पित है।जब अपनों का भरोसा टूटता है तो एक पल के लिए पूरी दुनिया अंधेरी हो जाती है। उस अंधेरे से लड़कर बाहर आना दूसरों के लिए उम्मीद की एक चराग रोशन करना है। गीता वर्मा ने जालंधर की एक ऐसी ही दास्तान भेजी जो कुछ दिन...
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amlendu asthana
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[24 May 2010 12:56 PM]



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