नहीं बनना महान
मुझे नहीं बनना आदर्श पुरुष,या फिर देवता...नहीं चाहिए लेबलमहान होने कामैं बने रहना चाहता हूं...सारी दुर्बलताओं से ग्रस्तएक आम इंसान!जो बिना झिझक केआंख को जो अच्छा लगे,मन को जो शीतल कर दे...प्राणों को जो झंकृत कर दे...उसको बिना हिचक-अपना कह दे!ऐसी दिव्यता...
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चण्डीदत्त शुक्ल
पुरानी कबिताई
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[24 May 2010 11:11 AM]



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