कितने सुंदर हैं गुब्बारे : कृष्णकुमार यादव की नई शिशुकविता

सरस पायस कितने सुंदर हैं गुब्बारेलाल-बैंगनी-हरे-गुलाबी,रंग-बिरंगे हैं ये प्यारे।एक नहीं हैं इतने सारे,कितने सुंदर हैं गुब्बारे।गुब्बारों की दुनिया होती,कितनी-प्यारी और निराली।हँस देते रोनेवाले भी,खिल जाती चेहरे पर लाली।हम सब दौड़ें इनके पीछे,कसकर पकड़े इन्हें हाथ... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

शिशुकविता

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[24 May 2010 10:30 AM]

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