यह गरमी तो...!
अरविंद चतुर्वेद----------------यह गरमी तो पिघला देगी!हमें-आपको पिघला देगी।झुलस रहे जो फुटपाथों परवे क्यों भला बजाएं तालीनेताजी की आग उगलती बातों पर!झटके पर झटका खाते हैंवे बेचारे, सरकार और मौसम कीसारी उलटी-सीधी घातों पर।लोकतंत्र में लोक कहां हैहमें-आपको...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[24 May 2010 10:53 AM]



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