गीत: काला कूट धुआँ....... --संजीव 'सलिल'

संजीव  सलिल  की  रचनाएँ गीत: संजीव 'सलिल'**तन-मन, जग-जीवन झुलसाता काला कूट धुआँ.सच का शंकर हँस पी जाता, सारा झूट धुआँ....आशा तरसी, आँखें बरसीं,श्वासा करती जंग.गायन कर गीतों का, पातीहर पल नवल उमंग.रागी अंतस ओढ़े चोला भगवा-जूट धुआँ.....पंडित हुए प्रवीण, ढाईआखर से... [पूरी पोस्ट]
writer आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

contemporary hindi poetry

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[24 May 2010 10:16 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix