“मौसम नैनीताल का” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
गरमी में ठण्डक पहुँचाता, मौसम नैनीताल का! मस्त नज़ारा मन बहलाता, माल-रोड के माल का!! नौका का आनन्द निराला, क्षण में घन छा जाता काला, शीतल पवन ठिठुरता सा तन, याद दिलाता शॉल का! लू के गरम थपेड़े खा कर, आम झूलते हैं डाली पर, इन्हें देख कर मुँह में...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
गीत
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[24 May 2010 10:14 AM]



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