फ़िल्मों में काम पाने के लिए वह किसी का भी बिस्तर गर्म करने को तैयार है, क्या यह चिन्ता का सबब नहीं ?
आज एक ऐसी बात ने झकझोर कर रख दिया है दिमाग़ को कि न कुछकहते बनता है और न कुछ लिखते बनता है......बस, अफ़सोस की एकलकीर पूरे ज़ेहन में खिंच गई है कि आखिर क्या हो गया है आज केइन्सान को ? दूसरों से आगे निकलने और कामयाब होने की होड़ मेंकोई कितना पतित हो सकता...
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[24 May 2010 09:48 AM]



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