ज़िन्दगी... सवालों-ज़वाबों के बीच...
सवाल इतने , कि ज़वाब कम पड़ गएविचार इतने, कि आपस में ही लड़ गएसोचते -सोचते अब तो दिमाग को भी थकान-सी महसूस होने लगीउसपर भी...वक़्त इतना कम कि घड़ी के कांटे भी एक-दूसरे से भिड गए...लोंगो को देखा हमेशा दौड़ते-भागतेन जाने क्या पा लेने की होड़ में हैंन किसी को...
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POOJA...
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[24 May 2010 09:35 AM]



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