विभेद
विभेद -- सत्येन्द्र झा दो लाश एक साथ जलाए जा रहे थे। उन में से एक खूब ताम-झाम के साथ.... लोगों की भारी भीड़ लगी थी उसके इर्द-गिर्द। दूसरी उदास कर्म की उदास प्रक्रिया के साथ। अमीर की लाश के पास खड़ी भीड़ मृतक का प्रशस्ति गान कर रही...
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मनोज कुमार
सत्येन्द्र झा
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[24 May 2010 09:00 AM]



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