लोकतंत्र की शानदार जिन्दगी

छोटी गली... आज हम अपनी उस दुनिया से बेगाने होते जा रहे हैं, जिसमें रहकर हम दुनियावालों की दुनिया में अपनापन महसूस करते थे। वह हमारी खास दुनिया या तो नकली उदासीनता या खोखली दिलचस्पी से कमोबेश छिन्न-भिन्न हो चली है। यदि कोई चीज उसे संभाले हुए है तो वह यह जिद की हमारी... [पूरी पोस्ट]
writer चन्दन कुमार

कोरा कागज़

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[24 May 2010 06:27 AM]

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