''शब..'

प्रियंकाभिलाषी.. ..."लिपट कर..रोई बहुत..गर्द से ढकी..जुस्तजू से महकी..दास्तान-ए-मोहब्बत..गलीचा-ए-गुल..नम हुआ..गम-ए-शहनाई..बाँह फैलाती..तेरी और मेरी..तस्सवुर की..बहती हुई..अरमानों की..रूह में पनपती..जिस्म में सुलगती..तूफानी मंज़र..आवारा..मदमस्त..मयकशी..'शब'..!!"...... [पूरी पोस्ट]
writer Priyankaabhilaashi
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[24 May 2010 05:17 AM]

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